Dec 16, 2012

बाबुल तेरे आँगन में

बहन  बनकर  आई  हूँ ...

बाबुल तेरे   आँगन   में ,

बसेरा  होगा  कल  मेरा  कहाँ  ...

जाने  किस  के  आँगन  में ...



क्यों  ये  रीत  इस  दुनिया  ने ...

हम  बहनों   के  लिए  बनायी  है ...

बचपन  जब  बाबुल  का  घर  है ,

फिर  क्यों  उन  से  ये  जुदाई  है ..



बाबुल  तेरे  साथ  रही  हूँ  ...

आज  कैसी  तुमसे  ये  जुदाई  है ,

बचपन  खेला  जब  आँगन  में  तेरे ,

आज  न  ये  कहो  के  तू  पराई  है ,



जब  मैं  बहुत  छोटी  थी ...

खिलोनो  से  खेला  करती  थी ,

गुड्डे -गुडिया  की  शादी  करके ...

झूठ -मूठ  रोया  करती  थी ,

अब  आज  जब  मेरी  विदाई  है ...



वोह  बात  समझ  में  आई  है ,

बचपन  की  वो  बातें  सोचकर ...

आँख  मेरी  भर  आई  है ,



ये   खुदा , क्यों  रिश्ता  हमारा ...

दुनिया  से  अलग  चलाया  है ,...

जाने  क्यों  सिर्फ  हम  बहनों  का .

तुमने  नसीब  ऐसा  बनाया  है ...!!!




15 comments:

  1. bahut hee bhav bheenee rachana.....

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  2. apni rachna क्या बात है
    vatvriksh ke liye bhejen rasprabha@gmail.com per blog link ke saath

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  3. बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना ..




    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  4. आपकी रचना जितनी सुंदर है उतना कर्सर के आसपास घूमता welcome का फ्लैग. अच्छा लगा. Pl remove 'word verification' option. It helps visitors.

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  5. सुन्दर भावों से सजी रचना| धन्यवाद|

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  6. आप सभी लोगो का धन्यवाद,
    वर्ड वेरिफिकेशन हटा दी गयी हैं
    आप लोगो को जो असुभिदा हुयी उसके लिए माफ़ी चाहता हु
    आप लोग अपना प्यार और असिर्वाद बनाये रखिये गा धन्यवाद,

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  7. ब्लाग पर आना सार्थक हुआ ।
    काबिलेतारीफ़ है प्रस्तुति ।

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  8. राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी नमस्कार और धन्यवाद,
    इसी तरह से अपना प्यार बनाये रखिये गा

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  9. bhai-bahan ke aseem pyar ko sahaj-saral dhang se bayan karti bhavbhari sundar rachna..
    aansoo aa gaye.

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  10. बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

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  11. दुनिया की रीत ही यही है।

    भावपूर्ण कविता।

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