Jun 30, 2017

टमाटर हो गया, देखो मालामाल

मारा मारा जो फिरा,  गलियों में बेहाल
वही टमाटर हो गया, देखो मालामाल ।।
सड़कों पर फैंका गया ,जैसे कोई अनाथ 
नहीं टमाटर आ रहा ,आज किसी  के हाॅथ ।।
भाव टमाटर का हुआ ,अब अस्सी के पार 
अच्छे अच्छे देखकर,टपका रहे हैं लार ।।
विना टमाटर के नहीं,अच्छी लगे सलाद  
भोजन का बेकार सब ,विना टमाटर स्वाद ।।
विना टमाटर के लगे ,घर का फ्रिज बेकार 
जैसे साली के विना ,लगती है ससुरार ।।
एक टमाटर सूॅघ कर ,दिल भर लेते आज 
विना टमाटर रो रही ,फुसक फुसक कर प्याज ।।
जब सड़ते थे टमाटर ,तब ना समझा मोल 
आज टमाटर हो गया ,साब किचिन से गोल।।
आनंदित हों आप सब ,देख टमाटर लाल 
विना टमाटर खाईये ,अब अरहर की दाल।।

Apr 22, 2017

मत पूछो मेरा दर्दो गम !

याद जो आयेगी आपकी
मैं खुद से  खफा कर लूंगा!

याद जो आयेगी आपकी बाते!
मैं खुद से ही  बयां कर लूंगा !!

कर लूंगा  खूद ही फैसला!
मैं वादे जफा कर लूंगा !!

नहीं आपकी जरूरत हमको !
मैं सपनों से ही वफा कर लूंगा !!

मत महका उपवन को मेरे !
मैं फूलों से यह दुआ कर लूंगा !!

मत पूछो मेरा दर्दो गम !
मैं  गम की दवा कर लूंगा!!

Mar 6, 2017

होली की बहार हैं

आई आई देखो होली की बहार हैं
होली का आलम हैं फागुन का मोसम हैं
दो दिलो का संगम है धड़कन में सरगम हैं
उड़े रे उड़े  देखो रंगों की फुआर हैं

मैं आ गया  होली में तुम भी हो टोली में
मैं भी हु टोली में रंग पड़ेगा होली में

गोरा बदन रंगों में सुन्दर लगेगा
गोरे बदन का सुन्दर मंजर लगेगा

रंग लगाने निकले हैं देखो प्रेम दीवाने गली गली
कोई भंग पिया कोई ठंढा दिल में प्यार  की जोत जली

नहीं आज किसी को छोड़ो होली का हें मोसम
रंग जो भी मिले लगा तो हें खुशियों का आलम

बच्चा हो या बुढा सबको होली का सरुर हें
गोरे गोरे गालो पे हसीनो को गरूर हें

बड़ा ही रंगीला यारो होली का ये त्यौहार हैं
प्यार और प्रेम का दीवाना विजय प्रताप हैं
आई आई देखो होली की बहार हैं
उड़े रे उड़े  देखो रंगों की फुआर हैं

Feb 6, 2017

आ गया है नन्हा सा  फरिश्ता  

आकाश के तारों को देखकर जागती थी तमन्ना
कोई एक तारा मेरे आँगन में भी उतरे
उतर आया है पूरा चाँद मेरे आँगन की बगीया  में
और रोशन हो गया है घर का हर कौना  उसकी चेहरे की चाँदनी से  
चमक गया है हर पल जैसे मेरे धूमिल पड़े जीवन का
मिल गया है मकसद  जैसे मुझे अपनी ज़िंदगी का .
आ गया है नन्हा सा  फरिश्ता  जीसे
देख कर जी नहीं भरता चाहे देखूँ हज़ारों बार

May 6, 2016

जब से हैं बंधे सात फेरों से सातों जनम

चूम ले रही हैं हर खुशी हमारे कदम !
जब से हैं बंधे सात फेरों से सातों जनम !
दरम्यां हमारे ना हाे मोहब्बत कम !!
आपके नूर से ही है रोशन समां !
लेके खुशबू तुम्हारी महकती फिजां !!
हो दुआ पाक दिल की खुदा की कसम !
दरम्यां हमारे ना हाे मोहब्बत कम !!
आपसे ही चमन अपना गुलजार है !
आपके अक्स में रब का दीदार है !!
आज तक जिंदगी में जो गुजरे हैं दिन !
दूने उसके मिले आज का ये सुदिन !
ख्वाब में भी न आए कभी कोई गम !
दरम्यां हमारे ना हाे मोहब्बत कम !!
चूम ले रही हैं हर खुशी हमारे कदम !
जब से हैं बंधे सात फेरों से सातों जनम !
दरम्यां हमारे ना हाे मोहब्बत कम !!

Mar 5, 2016

मुझ से नैना मिला के

दीवाना कर डाला तुमने मुझ को नैना मिला के
दिल का चैन तुम ने छीना मुझसे नैना मिला के

तिरछी नजर से तुम ने मारा है जो निशाना
अपनी आदा से किया तुमने मुझको दीवाना

डॉका तुमने दिल पे डाला मुझ से नैना मिला के
दीवाना कर डाला तुमने मुझ को नैना मिला के
लचकती है कमर जैसे बांस की हाे डाली
कान में बाली आैर  होंठों पर रखती हो लाली

हाय जीते जी मार डाली निधी तेरी ये जवानी
अपना बना डाली निकी तेरी ये जवानी

दीवाना कर डाला तुमने मुझ को नैना मिला के
दिल का चैन तुम ने छीना मुझ से नैना मिला के

Dec 16, 2012

बाबुल तेरे आँगन में

बहन  बनकर  आई  हूँ ...

बाबुल तेरे   आँगन   में ,

बसेरा  होगा  कल  मेरा  कहाँ  ...

जाने  किस  के  आँगन  में ...



क्यों  ये  रीत  इस  दुनिया  ने ...

हम  बहनों   के  लिए  बनायी  है ...

बचपन  जब  बाबुल  का  घर  है ,

फिर  क्यों  उन  से  ये  जुदाई  है ..



बाबुल  तेरे  साथ  रही  हूँ  ...

आज  कैसी  तुमसे  ये  जुदाई  है ,

बचपन  खेला  जब  आँगन  में  तेरे ,

आज  न  ये  कहो  के  तू  पराई  है ,



जब  मैं  बहुत  छोटी  थी ...

खिलोनो  से  खेला  करती  थी ,

गुड्डे -गुडिया  की  शादी  करके ...

झूठ -मूठ  रोया  करती  थी ,

अब  आज  जब  मेरी  विदाई  है ...



वोह  बात  समझ  में  आई  है ,

बचपन  की  वो  बातें  सोचकर ...

आँख  मेरी  भर  आई  है ,



ये   खुदा , क्यों  रिश्ता  हमारा ...

दुनिया  से  अलग  चलाया  है ,...

जाने  क्यों  सिर्फ  हम  बहनों  का .

तुमने  नसीब  ऐसा  बनाया  है ...!!!




Oct 27, 2012

तेरी मुहब्बत में

हम तेरी मुहब्बत में दिल की दुनिया लुटा बैठे |
तुम मानो  या ना मानो सनम तुम को अपना बना बैठे ||

अपने मन के मंदिर में तेरा घर बना  बैठे  |
तुम मानो  या ना मनो सनम तुम को इस घर में बसा बैठे ||

आँखों में तेरी सूरत बसा बैठे , रोग ये दिल का लगा बैठे  |
तुम मानो  या न मानो सनम तुम को अपना बना बैठे ||

जी ना पाउँगा तुम से अलग हो के येसा रोग लगा  बैठे |
दुनिया छुट जाये  साथ ना छूटेगा ये इरादा बना बैठे ||

हम तेरी
मुहब्बत में दिल की दुनिया लुटा बैठे |
तुम मानो  या ना मानो सनम तुम को अपना बना बैठे ||

हम तेरी
मुहब्बत में दिल की दुनिया लुटा बैठे |
हम  तुम  से  दिल  लगा  बैठे, चैन सकून गवा  बैठे ||

कभी  दुनिया  से  डरते  थे  छुप  छुप  के  मिलते थे |
ये  पर्दा  भी  हम हटा  बैठे  तुम्हे  अपना  बना  बैठे ||

हम तेरी
मुहब्बत में दिल की दुनिया लुटा बैठे |
तुम मानो  या ना मानो सनम तुम को अपना बना बैठे ||




May 22, 2012

क्रांतिवीर क्यों पथ में सोया ?

जीवन की बगिया में किसने कौन - कौन सा बिज बोया ?
ये तो केवल राम जी ही जाने ।

सत्य के रस्ते बदल रहे हैं, आज झूठ का सहारा लेकर
मूल्यों की रक्षा हो रही हैं, अनचाहे मूल्यों को देकर
परिवर्तन का बिगुल बजा कर क्रांतिवीर क्यों पथ में सोया ?
ये तो केवल राम जी ही जाने ।

सब के सर पर टोपी अना  की, सब की ऊँगली एक दुसरे पर थी |
किसने कितने करोड़ कमाये , इसकी चर्चा ज़ोरों पर थी |
पछतावे के गंगा जल से, कितनो ने अन्तरघट को थोया ?
ये तो केवल राम जी ही जाने ।


गाँधी जी का काम कर रहे हैं अना जी, 
सुबाश चन्द्र जी का कौन करेगा ? 
ये तो केवल राम जी ही जाने |


गोरे अग्रेजो से तो हम आजाद हो गये
 कालो से कब होंगे ?
ये तो केवल राम जी ही जाने  |  

नकली फूलो में सुगंध हैं, रंग हैं, पर मकरंद नहीं हैं
संयम शुचित हीन  व्यक्ति को जीवन का आनन्द नहीं हैं
छलनाओ की मकड़ जाल में कितनो ने नैतिक बल खोया ?
ये तो केवल राम जी ही जाने ।



गणनाओं में मगन बटोही, फिसलन की भी नहीं फिकर हैं
महापतन से वही बचेगा,  जिसको बस ईश्वर का डर हैं 
मंदिर से नैवैघ चुराकर, कौन पुजारी कितना रोया ?
ये तो केवल राम जी ही जाने ।




Jul 26, 2011

हर पल तुम्हे याद किया करते है


चुपके  चुपके  फ़रियाद  किया  करते  है 

हर पल तुम्हे  याद  किया  करते  है 


ये  हम  नहीं  कहते   ऑफिस वाले  कहा करते    है 


हम  प्रोग्राम की कोडिंग  में  भी  आपका  नाम  टाइप कर दिया करते हैं  !!


अपनी  आज  की मुलाकात  कुछ  अधूरी  सी   लगी ,


पास -हो -के -भी  थोड़ी  दुरी  सी   लगी ,


होठो -पे -हसी  आँखों  में  मज़बूरी  सी  -लगी !!


प्यार  में  मौत  से  डरता  कौन  है


प्यार  हो  जाता  है  करता  कौन  है


आप  जैसे  यार  पर  दुनिया  कुर्बान


और  आप  पूछते  हो  की  हम  पर  मरता  कौन  है  !!


बात  ऐसी  हो  की  जज्बात  कम  ना  हो


ख्यालात  ऐसे  हो  की  कभी   गम  ना  हो 


दिल  के  कोने  में  इतनी  सी  जगह  रखना 


की  ख़ाली  ख़ाली  सा  लगे  जब  हम   नहो  !!


गम  वो  जो  आंसू  ला  दे ,


ख़ुशी  वो  जो   गम  भुला  दे ,


हमें  तो  चाहिए  आपकी  इतनी  सी  मोहब्बत ,


जो  आपके  याद  करने  पर  हमें  एक  हिचकी  सी   हिला  दे  !!

ये आपसे मिलने का इंतजार
  बड़ा  सिला  देगा 

गुलाब  की  तरह  आपके  चेहरे  को  खिला  देगा 


ना  छोड़ना  कभी  मोहबत  की  इबादत  को 


मोहब्बत  खुद  तुम्हे  मोहब्बत  से  मिला  देगा  !!


 









Feb 10, 2011

तुम से मोहब्बत है

तेरी  चाहत  तेरी  जुस्तुजू  इस  दिल  में  है

मेरी  जान  मुझे  तुम  से  मोहब्बत  है


तेरा  वो  मुस्कुराना , शरमाके  पलकें  झुकाना

दबे  होंटों  से  फूलों  की  वो  सौगात  याद  है


फिर  लगी  किसकी  नज़र  तुम  हुये  दूर  मुझ  से

तेरी  आँखों  में  अश्क  बहते  जाना  याद  है


मेरी  कोई  खता  न  थी , न  तेरी  कोई  खता  थी

वो   बिछड़ता हुवा  लम्हा  वो  सिसकियाँ  याद  है


तू  लौट  आएगी  एक  दिन  मुझे  है  इतना  यकीन

आज  भी  इन  आँखों  में  तेरा  इंतज़ार  है 

Dec 27, 2010

महंगाई की मार

 
 
आदमी पर पड़ रही हैं महंगाई की मार,

आदमी को खा रही हैं , भ्रष्ट सरकार !


देश जाये भाड़ में कुएं में लोग बाग

नेताओ को चढ़ रहा हैं , कुर्सी का बुखार !


घोटाला नेताओ के लिए खेल  हो गया.

कानून बेवस्था भी इनके आगे फेल हो गया ?


हत्या बिन छपते नहीं  राजधानी  में अख़बार

गोली -बारी बच्चो का सा खेल हो गया ?


चोराहो पर रोज आते -जाते सब लोग

बिना बात रोज भुन- भुनाते सब लोग


मर  जाता कोई अभागा भीड़ में

अपनी -अपनी रह सब बढ़ जाते लोग


 कामनाए बढ़ रही हैं, बढ़ रही है भीड़

वासनाये बढ़ रही हैं , बढ़ रही हैं भीड़


कल के बगीचे श्मसान हो गए

ऊँचे घर वैश्या  की दुकान हो गये


भूले अपनी भाषा, तहजीब, और लिवाश,

लोग अंपने देश में अनजान हो गये .


गाँधी जी , सुभाष सदा रहते थे यहाँ ,

मीरा, दयान्द विष पीते थे यहाँ


कल बच्चे कैसे विशवास करेंगे

बुद्ध और विवेकानंद  कभी जीते थे यहाँ

 












Oct 11, 2010

रोते क्यू हो


अपने   घूंघट   से  यूँ  चेहरे  को  छुपाते  क्यू  हो ,

मुझ  से  शरमाते  हो  तो  सामने  आते  क्यू  हो ...


तुम  कभी  मेरे  तरह  कर  भी  लो  इकरार -ऐ- मोहबत ,

प्यार  करते  हो  तो  फिर  प्यार  छुपाते  क्यू  हो ...



अश्क  आँखों  में  मेरे  देख  के   रोते  क्यू  हो ,

दिल  भर  आता  है  तो  फिर  दिल  को  दुखते  क्यू  हो ...



रोज़  मर  मर  के   मुझे  जीने  को  कहते  क्यू  हो ,

मिलने  आते  हो  तो  फिर  लौट  के  जाते  क्यू  हो ...



अपने   घूंघट   से  यूँ  चेहरे  को  छुपाते  क्यू  हो ,

मुझ  से  शरमाते  हो  तो  सामने  आते  क्यू  हो ...


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विजय प्रताप सिंह राजपूत

Jul 23, 2010

आपसा यहाँ कोई नहीं

शान -ऐ-महफ़िल  हो    आप

आपसा  यहाँ  कोई  नहीं

जानते  नहीं  आप  सबको  मगर

आपसे  अनजान  यहाँ  कोई  नहीं


हर  नज़र  एक  दुसरे  से  ये  पूछती  है

इतनी  खूबसूरती  क्या  तुमने  कही  देखि  है

छाया  है  नशा  आपका

होश  में  यहाँ  कोई  नहीं

शान -ऐ -महफ़िल  हो  आप

आपसा  यहाँ  कोई  नहीं


आपकी  तारीफ  के    अल्फाज़  कहा  से  लु  में

डर  है  कोई  गुस्ताखी  ना  हो  जाये  मुझ  से

कातिल  हो  आप  दिलो  के

जिंदा  यहाँ  कोई  नहीं

शान -ऐ -महफ़िल  हो  आप

आपसा  यहाँ  कोई  नहीं

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विजय प्रताप सिंह राजपूत

Jul 4, 2010

हाय ये महंगाई


महंगाई  ये  महंगाई  हाय ये  महंगाई

सुबह मेने नास्ते में सुखी रोटी ही खायी 

रात को डिनर में
मेंने खिचड़ी ही पकाई

ये  गयी ओ गयी तनखाह खो गयी 

सुबह बटुआ रिचार्जे  किया
मेंने तो चुराने आयी

महंगाई  ये  महंगाई  हाय ये  महंगाई.

एक बात कहू दिलदारा  महगाई ने सबको मारा 

अब मुस्किल हुआ गुजरा महगाई ने सबको मारा

सरकार की हेरा फेरी पागल ना बना दे सबको

सी. एन. जी. और डीजल ने मसला बिगाड़ा 

अब मुस्किल हुआ गुजरा महगाई ने सबको मारा
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विजय प्रताप सिंह राजपूत